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  • मुस्लिम हर देश मे लड़ क्यों रहे हैं?

    मुस्लिम हर देश मे लड़ क्यों रहे हैं?

    जवाब:– इसका उत्तर बिल्कुल इसी मैसेज में ही मिल जाएगा।

    उनकी इस लिस्ट में कि मुस्लिम हर देश में लड़ रहे हैं वे भारत के बारे में कहते हैं कि भारत में हिंदुओं से लड़ रहे हैं?

    कहाँ लड़ रहे हैं भाई? अब ज़रा बताएँ की यह बात किस बुनियाद पर कही गई? जिस तरह यह झूठ गढ़ लिया गया है वैसे ही पूरी दुनिया के बारे में गढ़ कर वह बात साबित करने की कोशिश की जा रही है जो वास्तव में है ही नहीं।

    (यहाँ illusory correlation और confirmation bias techniques का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसे *ब्रेन वाशिंग प्रक्रिया* को जानने वाले आसानी से समझ सकते हैं।)

    भारत में ना मुसलमान-हिंदुओं से लड़ रहे हैं ना ही हिन्दू-मुसलमानो से लड़ रहे हैं। बल्कि दोनों एक दूसरे का साथ देकर महामारी से ज़रूर लड़ रहे हैं।

    हाँ! लेकिन यह बात ज़रूर है कि कुछ लोग 24 घण्टे हिन्दू-मुस्लिमो को लड़ा कर धर्म की राजनीति पर रोटी सेक कर सत्ता में बने रहने का अथक प्रयास ज़रूर कर रहे हैं और यह लोग कौन हैं यह बताने की ज़रूरत नहीं।

    अब आपको क्या लगता है? अल्पसंख्यको के धर्म को बुनियाद बना कर सत्ता हासिल करने का यह बड़ा ही आसान-सा जो गोल्डन फार्मूला है वह विदेशियों को नहीं पता होगा यह सिर्फ़ हमारे देश के नेताओ को पता है?

    बिल्कुल नहीँ। बल्कि यह तो राजनीति की किताबों में लिखा है। अब चूंकि मुस्लिम सिर्फ़ एक देश के वासी तो हैं नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हर नस्ल के हैं औऱ दुनिया के हर देश में हैं। तो स्वभाविक-सी बात है कि कई देशों में प्रमुख अल्पसंख्यको का धर्म इस्लाम ही है। अब या तो इसे इस्लाम की विशेषता कहें या कुछ औऱ।

    इसीलिए यह जो अल्पसंख्यको के धर्म की बुनियाद पर राजनीति की जाती है उसमें अक्सर मुस्लिम ही केन्द्र में होते हैं।

    तभी तो बताएँ इजराइल में बहुमत ना मिलने पर और सरकार ना बना पाने पर 1 साल का एक्सटेंशन और जनता का भावनात्मक सपोर्ट नेतन्याहू को फिलिस्तीन पर हमला करने के सिवा और कैसे हासिल हो सकता था?

    भला जिन देशों में औरतों के नग्न घूमने पर किसी को आपत्ति नहीं और इसे औरत की मर्ज़ी बताया जाता है उस देश में औरत की मर्ज़ी से चेहरा ढंकने पर हंगामा कर इसे रूढ़िवादिता बता कर राजनीति करने का मौका कैसे मिल पाता?

    म्यानमार हो या श्री लंका हर जगह यही है कि अल्पसंख्यको को केंद्र बनाओ बहुसंख्यको को भड़काओ और राजनीति करो।

    लेकिन इसके उलट अगर हम उन देशों की बात करें जहाँ मुस्लिम अधिक हैं और दूसरे धर्म के लोग वहाँ कम है तो आप यह पैटर्न कम ही देखेंगे। UAE, क़तर, ओमान, कुवैत, अरब, बहरीन में इस तरह की कोई बात नहीं देखी जाती वहाँ क्या दूसरे धर्मों के लोगों से बहुसंख्यक मुस्लिम लड़ रहे हैं?जबकि इन सभी देशों में मुस्लिम 70% से अधिक हैं?

    यदि आप खाड़ी देशों के अलावा देखना चाहते हैं तो एशिया में आप मलेशिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई देख लें। वहाँ भी यही स्थिति है।

    यह भी पर्याप्त नहीं तो फिर तुर्की, जॉर्डन, लेबनान, मोरक्को, मिस्र(इजिप्ट) देख लें। इनके अलावा भी देखना है तो अल्बानिया, सेनेगल, मालदीव, उत्तरी सायप्रस आदि और भी कई देश हैं जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है और दूसरे धर्मों के लोग सदियों से सुरक्षित औऱ सम्पन्नता से रह रहे हैं और वहाँ इस तरह से कभी नहीं सुना जाता कि रोहिंग्या की तरह पूरी की पूरी किसी दूसरे धर्म की आबादी को निष्कासित कर दिया गया हो।

    लेकिन इस तरह की राजनीति और बातें हम उन देशों में ज़रूर सुनते हैं जहाँ मुस्लिम अल्पसंख्यक हों उसके बाद भी इसका दोष भी उल्टा उन्हीं पर लगा दिया जाता है।

    हालाँकि इसके दुष्परिणाम बाद में वह देश व ख़ुद भुगतते है जैसे आज इस मार्ग पर आगे चला म्यानमार बर्बाद हो कर भुगत रहा है और ख़ुद हमारा देश इस अल्पसंख्यको केंद्र बना कर की गई धर्म और नफ़रत की राजनीति में अंधा होकर इस महामारी में बहुत कुछ भुगत चुका है।

    इसलिए समय है कि बेवजह के ब्रेन वाश करने वाले इन मैसेज को भेजने वाले और धर्म की राजनीति करने वाले ऐसे लोगों को अब ठीक से पहचान लिया जाए। क्योंकि जहाँ कहीं भी कोई लड़ रहा है उनके पीछे इन लोगों की मानसिकता और तंत्र ही काम कर रहा है जिस से देश और देशवासियों सभी का नुक़सान होता है।
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    सीरिया में मुस्लिम आपस में लड़ रहे हैं? इस बारे में पहले जवाब दिया जा चुका है जिसे हमारी website पर इस लिंक के ज़रिए पढ़ा जा सकता है। 👇
    https://islamconnect.in/2021/05/27/3775/

     

  • सीरिया में मुस्लिम-मुस्लिमों को ही मार रहै हैं?

    सीरिया में मुस्लिम-मुस्लिमों को ही मार रहै हैं?

    जवाब:- कुछ वर्षों पहले तक जो यह झूठा प्रचार (प्रोपेगेंडा) करते थे कि सभी आतंकी संगठन मुस्लिम ही होते हैं? उन्होंने अपने इस झूठ की निरंतर पोल खुलते देख अब 5% का रियायत (Concession) कर दिया है और अब वे 95% बताने लगे है।

     

    लेकिन आज भी झूठे ही साबित हो रहे हैं क्योंकि यह 100% की तरह 95% भी पूर्ण झूठ एवं निराधार है। इसको जानने के लिये ज़्यादा मेहनत करने की भी आवश्यकता नहीं बल्कि ख़ुद अपने देश भारत की NIA (National Intelligence Agency) की लिस्ट अध्ययन कर लेना ही काफी है। NIA द्वारा बैन किये गए आतंकी संगठनों पर नज़र डाले तो 4 दर्जन में 3 दर्जन संगठन का किसी भी तरह से कोई रिश्ता मुस्लिमों से नहीं है। बचे कुछ उर्दू नाम वाले संगठन तो इसमें से कुछ के तो अस्तित्व पर सवाल पूर्व पुलिस / रक्षा अधिकारियो ने ही उठाया और उनको महज सुरक्षा एजेंसियों कि कल्पना करार दिया। जबकि कुछ संगठनों पर कोर्ट में आज तक इलज़ाम साबित नहीं हुआ।

    अगर हम भारत में आतंकी हमलो का विश्लेषण करें तो जिन आतंकी हमलो के नाम पर मुस्लिम समाज के युवाओं को फंसाया गया था, वे सब बाइज्ज़त बरी हुए, मुख्य रूप से अक्षरधाम और संसद हमले में जिन मुस्लिमों को फंसाया गया वे सब बरी हो गए। मतलब असल हमलावर कोई और थे जिनको बचा लिया गया। लेकिन जब #अभिनव भारत जैसे असली आतंकियों को पकड़ा तो भारत में हमले बन्द हो गए।

     

    सीरिया में मुस्लिम-मुस्लिमों को मार रहे है?

    दुनियाँ में मुस्लिमों को आतंकी बता कर, फर्जी आतंकी संगठनों के नाम गढ़ कर ख़ुद मुस्लिमों पर आतंकी हमले करना कोई नई बात नहीं है।

    कुछ उदाहरण देखना हो तो अफ़ग़ानिस्तान ज़्यादा पुराना नहीं है। जिस आतंकी संगठन तालिबान को खत्म करने के नाम पर अमेरिका ने पूरे अफ़ग़ानिस्तान को तबाह कर दिया आज वह सरकार बनाने के लिए उसी तालिबान से वार्ताएँ कर रही है। तो क्या अमेरिका का अब हृदय परिवर्तन हो गया है या तालिबान कभी आतंकी संगठन नहीं था?

     

    ऐसे अनेक उदाहरण है मनगढ़ंत मुस्लिम नामो के संगठन या तो गढ़ लिये जाते हैं या अपनी आतंकी करतूतों को मुस्लिमों की आड़ में छुपा दिया जाता है। ताकि मासूमों पर हो रहे अत्याचार और आतंकी हमलों पर दुनियाँ आवाज़ ना उठाये।

    ऐसे ही ISIS के बारे में देखें तो दुनियाँ के कई राजनीतिक, सामरिक विश्लेषको ने मजबूत दलील के आधार पर ये साबित किया है कि ISIS मुस्लिम संगठन नहीं है, बल्कि इज़राइली ख़ुफ़िया एजेंसी #मोसाद के द्वारा बनाया गया भाड़े के गैर मुस्लिम अपराधियों का समूह है। जिसका उद्देश्य मुस्लिम देशों पर हमला कर उनको कमज़ोर कर तेल के कुंओ पर कब्जा करना है और #New World Order की नीव रखना है।

     

    जिन्हें इस पर विश्वास न हो वह ख़ुद Israel and state sponsored terrorism (इजरायल और राज्य प्रायोजित आतंकवाद) के बारे में ख़ुद सर्च कर पढ़ ले और उनके द्वारा अंजाम दी गई आतंकी घटनाओ के बारे में जान ले।

    इज़राइल रक्षा बल (Israel defense force) के चीफ गादी ईज़ानकोट (Gadi Eizenkot) ने ख़ुद कबूल किया था कि उन्होंने सीरिया में विद्रोहियों और आतंकियों को हथियार उपलब्ध कराए थे।

     

    अगर इतना अध्ययन ना भी करें तो कुछ सामान्य बुद्धि (कॉमन सेंस) से ही यह बात पता चल जाती है जैसे :-

     

    अगर ISIS मुस्लिम संगठन है और उसे इस्लामिक कंट्री बनाना था, तो आज कि तारीख में सबसे आसान काम है किसी मुस्लिम देश का हीरो बनना, सिर्फ़ अमेरिका और इज़राइल को दबानाजबकि ISIS कि गतिविधियों का केन्द्र देखे तो वह सीरिया, इराक, तुर्की, फिलिस्तीन के बीच है और ये सब इस्लामिक मुल्क है और वह इन्हें नुकसान पहुंचाने में लगा है।

    फिलिस्तीन और इज़राइल संघर्ष कई सालों से चल रहा हे।

    अगर ISIS इस्लामिक कंट्री बनाना चाहता था, तो वह इज़राइल पर हमला करता।

     

    # लेकिन इस संगठन ने इस्लामिक मुल्कों पर ही हमला किया।

     

    # इस संगठन के पास ऐसे हथियार थे, जो उन इस्लामिक देशों के पास भी नहीं हैं। वे कहाँ से आये?

     

    हथियार विश्व में कितने देश सप्लाय करते है..?

     

    # इस संगठन के पास इतनी दौलत कहाँ से आ गई जो ऐसे हथियार ले रहे हैं जिनको तो कई देश अफ़्फोर्ड ही नहीं कर सकते?

     

    ईरान जैसे देशों से तेल खरीदने पर बैन लगाया जा रहा है जबकि ISIS के कब्जे में जो तेल के कुँए थे उनसे लगातार तेल खरीदा गया। उस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया। क्यों..? और अमेरिका और यूरोप ने उससे तेल क्यों खरीदा?

     

    # सीरिया के साथ रूस और तुर्की जैसी ताक़त ISIS के ख़िलाफ लड़ रही। लेकिन ISIS के ना तो हथियार खत्म हो रहे थे, ना ही संसाधन।

     

    # ISIS इतना ताक़तवर संगठन कैसे बना कब बना….? की वह कई देशों से लड़ रहा है? और खुली भौगोलिक जानकारी होने और अमेरिका, इजराइल की पास अनंत शक्ति होने के बावजूद यह उसे खत्म क्यों नहीं कर रहे हैं? जबकि इनके तो पूरे के पूरे देश को सिर्फ़ 1 आतंकी ढूँढने के लिए ही खत्म करने के रिकॉर्ड हैं।

     

    और भी बहुत कुछ। अतः अब आपको अंदाजा हो गया होगा कि मुस्लिमों को आतंकी बता कर विश्व भर में ख़ुद आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले आतंकी कौन है? फिर चाहे वह देश में हो राष्ट्रीय स्तर पर या फिर विश्व में हो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर।